रेस्पांड कार्यक्रम

पीआरएल में  रेस्पॉंड कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भारत के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों के साथ सुदृढ़ संबंध स्थापित करना है। यह संबंध ऐसे अनुसंधान और विकास परियोजनाओं को संपूर्ण करके बनाए जाते हैं जो अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में प्रासंगिक हैं। रेस्पॉंड कार्यक्रम का लक्ष्य शैक्षणिक अनुसंधान को बढ़ावा देना, मानव संसाधन को प्रशिक्षित करके क्षमता निर्माण में सहायता करना, और भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम को समर्थन देने के उद्देश्य से शैक्षणिक संस्थानों में बुनियादी संरचना स्थापित करना है। रेस्पॉंड के अंतर्गत, अंतरिक्ष कार्यक्रम से संबंधित उन्नत क्षेत्रों में परियोजनाओं को, प्रमुख विश्वविद्यालयों/शैक्षणिक संस्थानों द्वारा शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। इसरो इन संस्थानों को आवश्यक तकनीकी सुविधाएं स्थापित करने में मदद करता है और शोधकर्ताओं को अत्याधुनिक अनुसंधान विषयों पर काम करने के लिए फेलोशिप भी प्रदान करता है। पीआरएल में किए जाने वाले अनुसंधान और विकास के प्रमुख विषय "अंतरिक्ष में अनुसंधान के क्षेत्र" नाम से विस्तृत दस्तावेज़ में प्रकाशित किए जाते हैं। यह दस्तावेज़ पीआरएल के प्रमुख कार्यक्रमों, और अंतरिक्ष विज्ञान में वर्तमान तथा आगामी अनुसंधान और विकास (R&D) आवश्यकताओं पर प्रकाश डालता है। यह दस्तावेज़ उन्नत अनुसंधान आवश्यकताओं को पूरा करता है, जिसके अंतर्गत देश भर के विभिन्न आईआईटी/एनआईटी और प्रमुख संस्थानों में स्थापित अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी प्रकोष्ठ (STCs), अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी ऊष्मायन केंद्र (STIC) और अंतरिक्ष के लिए क्षेत्रीय शैक्षणिक केंद्र (RAC-S)  अपने अनुसंधान और विकास (R&D) प्रस्तावों का चयन करके उन्हें प्रस्तुत कर सकते हैं। पीआरएल हर साल "रेस्पॉंड बास्केट" प्रस्ताव भी जारी करता है, जिसमें पीआरएल की अत्यावश्यक और महत्वपूर्ण अनुसंधान प्रस्तावों का संक्षिप्त विवरण दिया जाता है। इन आवश्यकताओं के आधार पर, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी प्रकोष्ठ (STCs) और अंतरिक्ष के लिए क्षेत्रीय शैक्षणिक केंद्र  (RAC-S) के अलावा, अन्य शैक्षणिक संस्थानों/विश्वविद्यालयों के संकाय सदस्य भी प्रस्तावों का चयन करके उन्हें तैयार कर सकते हैं। विशेष रूप से, पीआरएल का रेस्पॉंड कार्यक्रम भारत के शैक्षणिक संस्थानों को खगोल विज्ञान और खगोल भौतिकी, खगोल रसायन विज्ञान, ब्रह्मांड विज्ञान, पृथ्वी के वायुमंडल का भौतिकी, आयनमंडल और चुंबकमंडल, ग्रहीय और अंतर-ग्रहीय अंतरिक्ष भौतिकी, सौर भौतिकी, अंतरिक्ष मौसम, क्वांटम भौतिकी और संचार के क्षेत्रों में अनुसंधान और विकास गतिविधियां संचालित करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करता है।

अंतरिक्ष और रेस्पॉंड बास्केट में अनुसंधान क्षेत्रों का विवरण https://www.isro.gov.in/SupportedAreasofResearch.html पर उपलब्ध है।

रेस्पॉंड बास्केट दस्तावेज़: 2021, 2022, 2023, 2024, 2025

अंतरिक्ष में अनुसंधान क्षेत्र: 2018, 2021, 2023, 2025

फॉर्म्स 

रेस्पोन्ड प्रोजेक्ट: 2016-2020, 2021, 2022, 2023, 2024, 2025

रेस्पॉंड बास्केट सारांश: 2007-2025 



एसटीसी/एकाडेमिया (अकादेमिक संस्थानों) द्वारा किए जाने वाले अनुसंधान अध्ययन भावी अंतरिक्ष गतिविधियों की दिशा में निर्देशित होने की आशा है, जो इसरो द्वारा शुरू किए गए विभिन्न मिशनों के लिए एक अच्छा पूरक हो सकते हैं।

हाइलाइट

  1. युवा वैज्ञानिकों के लिए कोस्पार 2025 उत्कृष्ट पेपर पुरस्कार श्री कुणाल करण को दिया गया है। यह पुरस्कार उनके शोध पत्र-"अर्ध-शुष्क क्षेत्र में जल संसाधन प्रबंधन के लिए ओपन-सोर्स पृथ्वी अवलोकनों का उपयोग करके स्थूल-स्केल ग्रिड-आधारित वर्षा डेटा का स्थानिक विघटन" के लिए दिया गया है। इस शोध पत्र के लेखक कुणाल करण, धर्मवीर सिंह, अमज़द हुसैन लस्कर और अन्य हैं, और यह एडवांसेज इन स्पेस रिसर्च के वॉल्यूम 76, इश्यू 5 (1 सितंबर 2025, पृष्ठ 2643-2661) में प्रकाशित हुआ है।

    यह शोध कार्य रेस्पॉंड बास्केट RES-PRL-2022-005 के अंतर्गत किया गया था, जिसका शीर्षक था-भारत में भूजल गतिशीलता: रेडियोकार्बन, स्थिर समस्थानिक अनुपात  और उपग्रह डेटा का उपयोग करके जांच। यह परियोजना कार्य सिम्बायोसिस इंस्टीट्यूट ऑफ जियोइन्फॉर्मेटिक्स, पुणे के डॉ. धर्मवीर सिंह (पीआई) और पीआरएल के डॉ. अमज़द लस्कर (सह-पीआई) द्वारा किया गया था।