भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (पीआरएल), जो भारत सरकार के अंतरिक्ष विभाग की स्वायत्त यूनिट है, खगोल विज्ञान और खगोल भौतिकी, सौर और हीलियोफिजिक्स, अंतरिक्ष और वायुमंडलीय विज्ञान, भू-विज्ञान, ग्रहीय विज्ञान और सौर मंडल अन्वेषण, परमाणु, आणविक और प्रकाशिक भौतिकी, तथा सैद्धांतिक भौतिकी के क्षेत्रों में मूलभूत अनुसंधान करती है। इस प्रयोगशाला में कई विश्व-स्तरीय प्रायोगिक, अवलोकन और कंप्यूटिंग सुविधाएं उपलब्ध हैं, जो अहमदाबाद के नवरंगपुरा और थलतेज स्थित इसके चार परिसरों, माउंट आबू स्थित इन्फ्रारेड वेधशाला और उदयपुर स्थित सौर वेधशाला में फैली हुई हैं। पीआरएल में किए जाने वाले अनुसंधान में कुछ विशिष्ट क्षेत्र भी शामिल हैं, जैसे ग्रहीय और अंतरिक्ष मिशन, खगोल-रसायन विज्ञान, फेम्टो-सेकंड लेज़र, क्वांटम संचार, बाह्य-ग्रह (Exo-planets), जैव-भूविज्ञान, पुरा-जलवायु विज्ञान, उल्कापिंडों/नमूनों का प्रयोगशाला विश्लेषण और न्यूट्रिनो भौतिकी।
अधिक जानकारी के लिए, पीआरएल की वेबसाइट देखें: https://www.prl.res.in/
ग्रीष्मकालीन इंटर्नशिप कार्यक्रम वैज्ञानिकों/इंजीनियरों के साथ चर्चा करने का एक मंच प्रदान करेगा, जिससे प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों के युवा शैक्षणिक प्रतिभा वाले विद्वान और शोधकर्ता, जो पीआरएल कार्यक्रमों से संबंधित विज्ञान/प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में स्नातक/स्नातकोत्तर/अनुसंधान कर रहे हैं, उन्हें अवसर मिल सके। इस योजना के निम्नलिखित उद्देश्य हैं:
- युवा शैक्षणिक प्रतिभा को आपसी लाभ के लिए पीआरएल वैज्ञानिकों के साथ जुड़ने का अवसर प्रदान करना;
2. "इंटर्न" को अनुसंधान संस्थान के कामकाज को समझने और सिद्धांत को व्यवहार में लाने का अनुभव प्राप्त करने से लाभ मिल सकता है। यह कार्यक्रम युवा प्रतिभा को अपने करियर का मार्ग चुनने में सहायता करेगा;
भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (Physical Research Laboratory) द्वारा मई 11 से जुलाई 10, 2026 तक हाइब्रिड (ऑफलाइन और ऑनलाइन) मोड में आयोजित होने वाले ग्रीष्मकालीन इंटर्नशिप कार्यक्रम के लिए, भारतीय नागरिकता वाले अकादमिक रूप से उत्कृष्ट और अत्यधिक प्रेरित स्नातक और स्नातकोत्तर छात्रों तथा कॉलेज शिक्षकों से आवेदन आमंत्रित किए जाते हैं। कृपया ध्यान दें कि इंटर्नशिप के लिए केवल सीमित संख्या में ही प्रोजेक्ट उपलब्ध होंगे। प्रतिभागी संस्थान के किसी संकाय सदस्य के साथ मिलकर एक विशिष्ट प्रोजेक्ट पर काम करेंगे। प्रोजेक्ट की प्रकृति के आधार पर ही यह तय किया जाएगा कि उसका मोड ऑफलाइन होगा या ऑनलाइन।

