एस.पी.ए.एससी. प्रभाग अंतरिक्ष भौतिकी के व्यापक क्षेत्र के अंतर्गत, सौर स्थलीय अन्योन्यक्रियाओं, अंतरग्रहीय माध्यम पर सौर प्रभाव, पृथ्वी के चुंबकमंडल-आयनमंडल-तापमंडल अन्योन्यक्रियाओं, अंतरिक्ष मौसम और सामाजिक अनुप्रयोगों पर इनके प्रभावों, मध्यमंडल-निम्न तापमंडल गतिशीलता की जांच, भू- और अंतरिक्ष-आधारित प्रकाशिक और रेडियो उपकरणों के निर्माण में सम्मिलित है। यह प्रभाग भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान कार्यक्रमों में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिनमें उल्लेखनीय आदित्य-L1 मिशन, आगामी ड्यूअल-ऐरोनॉमी सैटेलाइट मिशन दिशा, तथा शुक्र/मंगल ग्रहीय मिशन, जिसमें पीआरएल इसरो के दिशा मिशन में विज्ञान संबंधी नेतृत्व में है।
एस.पी.ए.एससी. प्रभाग के संकाय सदस्य, सौर स्थलीय भौतिकी पर वैज्ञानिक समिति (स्कोस्टेप) के प्रेस्टो (प्रिडिक्टेबलिटी ऑफ द वेरिएबल सोलर-टेरेस्ट्रियल कपलिंग), अंतरिक्ष शोध पर समिति (कोसपार) जैसे प्रमुख अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।
वर्तमान शोध विषय
1. स्वदेशी अंतरिक्ष-वाहित मापों का उपयोग करके जांच
(क) सौर पवन और सूर्यमंडलीय अध्ययन: आदित्य-L1 मिशन पर आदित्य सोलर विंड पार्टिकल एक्सपेरिमेंट (ASPEX) से बहु-दिशात्मक, अल्फा-प्रोटॉन से अलग किए गए मापों का उपयोग करके सौर और सूर्यमंडलीय प्रक्रियाओं की जांच करने के अवसर उपलब्ध हैं।
(ख) सौर पवन में ऊर्जावान कण: सुप्राथर्मल और सोलर एनर्जेटिक कणों (SEPs) की स्रोत आबादी और ऊर्जाकरण तंत्र को समझने के लिए ASPEX से प्राप्त सौर हवा में ऊर्जावान आयनों के बहु-दिशात्मक माप का उपयोग किया जा सकता है।
ASPEX में स्टेप्स और स्विस दो उपकरण हैं जिनके माप अद्वितीय हैं और संबंधित क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रभाव डालने की क्षमता रखते हैं। ASPEX के बारे में अधिक जानकारी के लिए कृपया https://www.prl.res.in/ASPEX/ देखें।
(ग) आयनमंडल-तापमंडल प्रणाली और अंतरिक्ष मौसम: निकट-पृथ्वी अंतरिक्ष पर्यावरण की जांच के लिए, पीआरएल प्रमुख भूमिका निभा रहा है। DISHA जैसे भविष्य के ऐरोनॉमी मिशन की योजना बनाई जा रही है और इस मिशन की पृष्ठभूमि तैयार करने के लिए पृष्ठभूमि विज्ञान के विषयों पर ध्यान दिया जा रहा है। DISHA मिशन के लिए उच्च आवृत्ति लैंगम्यूर जांच, आयन ड्रिफ्ट मीटर और एयरग्लो फोटोमीटर पेलोड को पीआरएल में डिजाइन और निर्मित किया जा रहा है।
2. चुंबकमंडल-आयनमंडल-तापमंडल (एमआईटी) युग्मन: सौर वायु और चुंबकमंडल से आयनमंडल-तापमंडल (आईटी) प्रणाली में ऊर्जा और संवेग का स्थानांतरण विद्युत क्षेत्र, आयन बहाव, इलेक्ट्रॉन घनत्व, तटस्थ घनत्व, तटस्थ हवा आदि को बदलता है। IT ऊंचाइयों पर अंतरिक्ष मौसम के प्रभाव का व्यापक आकलन, प्लाज्मा और तटस्थ प्रक्रियाओं और उनकी अन्योन्यक्रियाओं को समझने के लिए विभिन्न अंतरिक्ष और भू-आधारित प्रयोगों का उपयोग किया जाता है।
3. आयनमंडलीय विद्युतगतिकी: निम्न अक्षांश आयनमंडल उच्च स्तर की स्थानिक- एवं समय के साथ परिवर्तनशीलता प्रदर्शित करता है। प्लाज्मा घनत्व वितरण में तीव्र उतार-चढ़ाव और कई विद्युतगतिकी और प्लाज्मा प्रक्रियाओं द्वारा उत्पन्न अनियमित संरचनाएं नेविगेशन सिस्टम (GNSS, GPS, IRNSS/NaVIC आदि) के निष्पादन को खराब कर देती हैं। इन प्रक्रियाओं को समझने के लिए डिजीसोंडे और प्रकाशिक प्रयोगों का उपयोग किया जाता है।
4. वायुमंडल में ऊर्ध्वाधर युग्मन: सौर बल के अतिरिक्त, IT प्रणाली गुरुत्वाकर्षण तरंगों, ज्वार, ग्रहीय तरंगों आदि के माध्यम से निचले वायुमंडल से बल द्वारा भी प्रभावित होती है। अनोखे, अत्याधुनिक विभिन्न तरंग दैर्ध्य पर दिन समय प्रकाशिक वायुचमक उत्सर्जन, भिन्न अक्षांशों पर रेडियो माप, चुंबकीय और तटस्थ हवा माप का उपयोग करके इसकी जांच की जाती है।
5. ऊपरी आयनमंडलीय गतिशीलता: आयनमंडल का ऊपरी हिस्सा आयनमंडलीय टोटल इलेक्ट्रॉन कन्टेन्ट (टीईसी) में प्रमुख योगदानकर्ता है, जो आयनमंडल के परे रेडियो तरंगों द्वारा अनुभव की गई सीमा विलंब का अनुमान लगाने के लिए एक महत्वपूर्ण पैरामीटर है। इस क्षेत्र की खोज की सीमितताओं के कारण अपर्याप्त अवलोकन, मॉडल में कई अस्पष्टताएं उत्पन्न करते हैं। ऊपरी आयनमंडलीय गतिशीलता का पता लगाने के लिए मॉडलन और समावेशन तकनीकों को नियोजित करना, बेहतर सटीकता सहित आयनमंडलीय लक्षण वर्णन के लिए आवश्यक है।
6. भू-आधारित जांच के लिए प्रकाशिक इंस्ट्रूमेन्टेशन: ऊपरी वायुमंडलीय और अंतरिक्ष मौसम अनुसंधान के लिए, पीआरएल संस्थान, कई अत्याधुनिक भू-आधारित प्रकाशिक उपकरणों के निर्माण में देश में अग्रणी रहा है। इनमें दृश्यमान, पराबैंगनी और अवरक्त वर्णक्रमीय क्षेत्रों में दिन समय वायुचमक उत्सर्जन माप के लिए उच्च वर्णक्रमीय विभेदन और विशाल दृश्यक्षेत्र बहु तरंग दैर्घ्य स्पेक्ट्रोग्राफ, संकीर्ण बैंडविड्थ और संकीर्ण दृश्यक्षेत्र प्रकाशमापी, बहु तरंग दैर्घ्य प्रकाशमापी, विस्तृत क्षेत्र प्रकाशिक इमेजर्स इत्यादि शामिल हैं। जिनके पास इंस्ट्रूमेन्टेशन की कला है वे ऐसे उपकरणों के निर्माण में भाग ले सकते हैं और रोमांचक वैज्ञानिक परिणाम प्राप्त कर सकते हैं।
7. एआई/एमएल तकनीकों का उपयोग करके अंतरिक्ष मौसम का पूर्वानुमान: अंतरिक्ष मौसम फ्लैग विकसित करने के लिए ASPEX डेटा में मशीन लर्निंग का उपयोग किया जा सकता है जो भू-चुंबकीय तूफान और चुम्बकमंडलीय छोटे तूफान उत्पन्न करने में सौर प्रक्षोभों की भू-प्रभावशीलता को पकड़ सकता है।
इसरो/अंतरिक्ष विभाग या अन्य एजेंसियों द्वारा वित्त पोषित परियोजनाएं
- आदित्य-L1 मिशन पर आदित्य सोलरविंड पार्टिकल एक्सपेरिमेन्ट (ASPEX) (इसरो द्वारा वित्त पोषित, वर्तमान में जारी)
- इलेक्ट्रॉन कन्टेन्ट अनुमान की सटीकता में सुधार के लिए निचले आयनमंडल का लक्षण वर्णन (SRG योजना के तहत SERB द्वारा वित्त पोषित, वर्तमान में जारी)
- वीनस मिशन के लिए सेंसर पेलोड विकास (इसरो द्वारा वित्त पोषित, पूरा)
उपकरण सुविधाएं
- ऑल-स्काई इमेजर
- सीसीडी-आधारित डे-टाइम एयरग्लो फोटोमीटर
- सीसीडी-आधारित मल्टीवेवलेंथ एयरग्लो फोटोमीटर
- सीसीडी-आधारित फोटोमीटर फॉर मेसोस्फेरिक टेम्प्रेचर
- डिजिसॉन्डे पोर्टेबल साउंडर
- फैब्री-पेरो इंटरफेरोमीटर *
- जीपीएस/जीएनएसएस/आईआरएनएसएस रिसीवर्स
- हाई थ्रूपुट इमेजिंग एशेले स्पेक्ट्रोग्राफ
- मेसोस्फीयर-थर्मोस्फीयर एयरग्लो फोटोमीटर
- मल्टीवेवलेंथ इमेजिंग एनालाइजर यूज़िंग एशेले ग्रेटिंग
- नैरो-बैंड नैरो-फ़ील्ड ऑफ़ व्यू फोटोमीटर
- नियर इन्फ्रारेड इमेजिंग स्पेक्ट्रोग्राफ
- पीआरएल-एयरग्लो इंफ्रा-रेड स्पेक्ट्रोमीटर
- शॉर्ट-वेव इन्फ्रा-रेड इमेजर*
*अभी विकसित किये जा रहे हैं